Anxiety

Anxiety या चिंता को इग्नोर करना खतरनाक हो सकता है

आज के समय में एंग्जायटी एक बहुत कॉमन समस्या है | लेकिन इसे इगनोर किया जाये तो यह एक मानसिक बीमारी बन जाती है | रेड्डी और चंद्रशेखर ने 13 अलग-अलग शोध का मेटा-एनालिसिस करके पाया की भारत में लगभग 21% लोगो को एंग्जायटी की बीमारी होती है | हम एंग्जायटी के बारे में तो बहुत सुनते हैं पर अक्सर उसे नजरअंदाज कर देते हैं | यदि इसे लगातार बहुत समय तक इगनोर किया जाये तो यह डिप्रेशनरूप ले भी सकती है। आजकल युवाओं के बीच ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सही परेंटिंग न होने के कारण और आजकल के कॉम्पीटेटीव युग में आगे बढ़ने की अंधी होड़ लगी है और युवा उसमे सबसे आगे है | उसे सबसे आगे बढ़ने की चाह है और इसलिए वो चिंता का शिकार हो जाता है जो की एंग्जायटी डिसऑर्डर में बदल जाती है | सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि अब तो बच्चों में भी ऐंग्जाइटी के लक्षण काफी आम हैं।

एंग्जायटी क्या है?

साधारण शब्दों में बिना किसी कारण के चिंता या घबराहट को ही एंग्जायटी कहते हैं | जैसे चिंता करना कि आने वाले समय में कुछ बुरा या खराब होने वाला है जबकि इनका कोई वास्तविक आधार नहीं होता। थोड़ी-बहुत चिन्ता सभी को होती है क्यूंकि यह हमारे लक्ष्य की प्राप्ति या सफलता के लिए आवश्यक भी है। लेकिन यदि चिंता बहुत बढ़ जाती है तो यह व्यक्ति के दैनिक पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन पर असर डालने लगती है | ऐसे में हम इसे घबराहट और चिंता रोग (Anxiety Disorder) कहते हैं।

 

ऐंग्जाइटी के लक्षण

कुछ ऐसे सामान्य लक्षण जिन्हें हम इन्ग्नोर करते हैं लेकिन वे एंग्जायटी होने का संकेत देते हैं जैसे –

1.   घबराहट, डर लगना या बैचेनी होना

2.   नींद में समस्या

3.   हाथ पैर ठन्डे पड़ना, सुन्न पड़ जाना या झुनझुनी आना

4.   बिना कारण पसीना आना

5.   साँस लेने में दिक्कत या जोर-जोर से सांसे चलना

6.   चक्कर आना या जी मचलाना

7.   मांसपेशियों में एंठन

8.   कमजोरी या सुस्ती रहना

9.   एकाग्रता का आभाव

10.  अक्सर पाचन सम्बन्धी समस्या होना  

ऐंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति टेंशन और डर में तो रहता है और वह अपने आपको दूसरों से या समाज से अलग-थलग कर लेता है | उसे अकेले रहना पसंद होता है और अकेलेपन में वह उन्हीं बातों के बारे में ज्यादा सोचता है जो उसे दुख देती हैं। हर वक्त उस मन में नकारात्मक ख्याल ही चलते रहते हैं। किसी भी काम में मन नहीं लगता। जिसके कारण उसके दैनिक जीवन में कठिनाइयाँ आने लगती हैं |

 

एंग्जायटी से कैसे निपटे ?

सबसे पहले यह समझने की जरुरत है की इस रोग का उपचार प्रभावी ढ़ंग से किया जा सकता है | कुछ सेल्फकेयर टिप्स नीचे दिए गए हैं जिनको अपनाकर लोग एंग्जायटी से निपट सकते हैं | यदि इनसे फायदा न हो तो एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति को प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक से उपचार लेने की जरुरत पड़ती है | मनोवैज्ञानिक चिकित्सा में व्यक्ति के विचारों और व्यवहारों में पर कार्य कर इनमे परिवर्तन लाया जाता है ।

 

एंग्जायटी से पीडित व्यक्ति के सेल्फकेयर के लिए टिप्स –

1. सजग रहें और अपने लक्षणों की गंभीरता को पहचाने | यदि लक्षण गंभीर हैं या बहुत समय से लगातार बने हुए हैं तो आपको निश्चित रूप से मनोवैज्ञानिक से मिलना चाहिए।

2. लोगो से मेलजोल पहले के जैसे ही रखने की कोशिश करने | आस-पडोस, समाज, करीबियों और दोस्तों के साथ मिलना जुलना शुरू करें | खुद को अकेला मत होने दीजिए। दोस्तों से बात करिए, नए दोस्त बनाइए, उनसे बात करिए |

3. नींद की समस्या से निपटे | अपना टाईमटेबल बनायें जिसमे खाने और सोने का समय निर्धारित करें | यदि नींद आये तो किताब पढ़ें | ऐसे में टीवी/मोबाइल ना देखें |

4. व्यायाम अथवा योग से एंग्जायटी में बहुत फायदा पहुंचता है | नियमित रूप से हल्के-फुल्के योगासन करें या टहलने जाएँ |

5. सबके जीवन में कभी न कभी कठिनाईयां आती है ऐसे में अपनी परेशानी बाटने से कम होती है | कठिनाई के बारे में निकट सहयोगी या मित्र के साथ बात करें और उनकी राय से उनका हल निकालने का प्रयास करें |

 

6. अनियमित खान-पान से भी ऐंग्जाइटी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। जंक फ़ूड खाना, समय से न खाना, ओवरईटिंग या फिर कम खाना, ज्यादा काफी और चाय  पीना | कैफीन पीने से हार्टबीट बढ़ जाती है और यह व्यक्ति को नर्वस फील करा सकती है।